सुखसुविधा की खोजमें भागदौड़ ने हमारे जीवनसे स्वस्थ व शांति को छीन, हमें विचलित कर दिया। तन, मन व वातावरण सहित पूरा परिवेश पश्चिमकी भेंट चढ़ गया है। उसे सही मार्ग पर लाने हेतु खानपान, रहनसहन, रीतिरिवाज़ सहित संस्कारित करने हेतु तत्त्वज्ञान, वास्तु,योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर हम अपने जीवनको उचित शैली में ढाल सकते हैं। यदि आप इस विषयमें विशेष योग्यता रखते है, लिखें, निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें,संपर्कसूत्र-तिलक संपादक युगदर्पण 09911111611, 9999777358.

बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य

: : : क्या आप मानते हैं कि अपराध का महिमामंडन करते अश्लील, नकारात्मक 40 पृष्ठ के रद्दी समाचार; जिन्हे शीर्षक देख रद्दी में डाला जाता है। हमारी सोच, पठनीयता, चरित्र, चिंतन सहित भविष्य को नकारात्मकता देते हैं। फिर उसे केवल इसलिए लिया जाये, कि 40 पृष्ठ की रद्दी से क्रय मूल्य निकल आयेगा ? कभी इसका विचार किया है कि यह सब इस देश या हमारा अपना भविष्य रद्दी करता है? इसका एक ही विकल्प -सार्थक, सटीक, सुघड़, सुस्पष्ट व सकारात्मक राष्ट्रवादी मीडिया, YDMS, आइयें, इस के लिये संकल्प लें: शर्मनिरपेक्ष मैकालेवादी बिकाऊ मीडिया द्वारा समाज को भटकने से रोकें; जागते रहो, जगाते रहो।।: : नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक विकल्प का सार्थक संकल्प - (विविध विषयों के 28 ब्लाग, 5 चेनल व अन्य सूत्र) की एक वैश्विक पहचान है। आप चाहें तो आप भी बन सकते हैं, इसके समर्थक, योगदानकर्ता, प्रचारक,Be a member -Supporter, contributor, promotional Team, युगदर्पण मीडिया समूह संपादक - तिलक.धन्यवाद YDMS. 9911111611: :

Thursday, June 2, 2016

जल संकट से निबटने में जन भागीदारी का हो साथ

जल संकट से निबटने में जन भागीदारी का हो साथ 

जल संकट से निबटने को जन भागीदारी बेहद जरूरीप्रधानमंत्री ने जल संकट के समाधान को लेकर कई प्रदेशों द्वारा अपने स्तर पर किये गये प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इसके बाद भी तथ्य यह है कि वर्तमान में देश के एक दर्जन से राज्यों में सूखे की स्थिति हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात' के 20वें संस्करण में देश में व्याप्त जल संकट से निबटने के लिये जन भागीदारी की अपील की है। ऐसे में मूल प्रश्न यह है कि प्रधानमंत्री की मन की बात देश की जनता के मन को कितना प्रभावित करेगी। क्या प्रधानमंत्री की चिंता और अपील से प्रभावित होकर देशवासी जल दुरूपयोग से लेकर संचयन तक के उपायों को अपनाएंगे। प्रश्न यह भी है कि करोड़ों−अरबों की योजनाओं और भारी भरकम मंत्रालयों एवं सरकारी मशीनरी के बाद भी देश में जल संकट ऐसा गंभीर रूप क्यों धारण कर रहा है। और समाज का बड़ा भाग पर्याप्त पानी से वंचित है। हम सबको सोचना होगा कि, क्या पानी हमारी आवश्यकता भर है, क्या हर जीव की इस आवश्यकता को पूरा करने के प्रति हमारा कोई दायित्व नहीं? कैसे मिलेगा पानी, जब हम उसे नहीं बचाएंगे? इन सभी प्रश्नों के उत्तर में हमें शर्मिंदा होना चाहिए, क्योंकि भारत का भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ये आने वाले भयावह समय का संकेत है, जब हम पानी की एक बूंद के लिए तरस जाएंगे। 
बचपन से लेकर अभी तक हमें जल के महत्व के बारे में पढ़ाया जाता रहा है, किन्तु इस पर हम कभी व्यवहार नहीं करते हैं। दैनिक जीवन में जाने−अनजाने में हम जल का अपव्यय खूब करते हैं। सवेरे उठते ही सबसे पहले हम शौच के लिए जाते हैं, उसके बाद हम ब्रश या दातून से अपने दांतों की सफाई करते हैं। फिर हम घर की सफाई करते हैं, कपड़े धोते हैं, नहाते हैं, चाय पीते हैं, भोजन पकाते हैं, खेतों की सिंचाई करते हैं और सबसे मुख्य बात है कि पानी पीते हैं। देखा जाए तो हमारे दैनिक जीवन में पानी सबसे बड़ी आवश्यकता है, इसके बिना हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। भोजन या अन्य चीजों का विकल्प हो सकता है, किन्तु पानी का विकल्प अभी कुछ भी नहीं है। जन्म से लेकर मृत्यु तक यह एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जिसे हम कभी भी नहीं खोना चाहते हैं। पृथ्वी पर जल की उपलब्धता इस समय प्राय: 73 % है, जिसमें मानवों के उपयोग करने योग्य जल मात्र 2.5 % है। 2.5 % पानी पर ही पूरा विश्व निर्भर है। देश के जितने भी बड़े बांध हैं, उनकी क्षमता 27 % से भी कम रह गई है। 91 जलाशयों का पानी का स्तर गत एक वर्ष में 30 % से भी नीचे पहुंच चुका है। 
स्वतंत्रता बाद से देश में लगभग सभी प्राकृतिक संसाधनों की निर्ममता से लूट हुई है। जल का तो कोई मुल्य हमारी दृष्टी में कभी रहा ही नहीं। हम यही सोचते आये हैं कि प्रकृति का यह अमुल्य कोष कभी कम नहीं होगा। हमारी इसी सोच ने पानी की बर्बादी को बढ़ाया है। नदियों में बढ़ते प्रदूषण और भूजल के अंधाधुंध दोहन ने गंगा गोदावरी के देश में जल संकट खड़ा कर दिया है। यह किसी त्रासदी से कम है क्या कि महाराष्ट्र के लातूर में पानी के लिए खूनी संघर्ष को रोकने के लिए धारा 144 लागू है। कई राज्य भयानक सूखे की स्थिति में हैं। कुंए, तालाब लगभग सूख गए हैं। बावड़ियों का अस्तित्व समाप्त प्राय है। भूजल का स्तर निम्नतम जा चुका है। जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ने के साथ कल−कारखाने, उद्योगों और पशुपालन को बढ़ावा दिया गया, उस अनुपात में जल संरक्षण की ओर ध्यान नहीं गया जिस कारण आज गिरता भूगर्भीय जल स्तर घोर चिंता का कारण बना हुआ है। अब लगने लगा है कि आगामी विश्व यु़द्ध पानी के लिए ही होगा। 
जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय झारखण्ड के सिमोन उरांव वर्तमान जल संकट को लेकर कहते हैं कि 'लोग धरती से पानी निकालना जानते हैं। उसे देना नहीं।' देखा जाए तो पहले सभी स्थानों पर तालाब, कुएं और बांध थे, जिसमें बरसात का पानी जमा होता था। अब धड़ल्ले से बोरिंग की जा रही है। जिससे वर्षा का पानी जमा नहीं हो पाता है। शहरों में तो जितनी भूमि बची थी लगभग सभी में अपार्टमेंट और घर बन रहे हैं। उनमें धरती का कलेजा चीरकर 800−1000 फुट नीचे से पानी निकाला जा रहा है। वहां से पानी निकल रहा है, पर जा नहीं रहा तो ऐसे में जलसंकट नहीं होगा तो क्या होगा? विश्व में जल का संकट कोने−कोने व्याप्त है। आज हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। विश्व औद्योगीकरण की राह पर चल रहा है, किंतु स्वच्छ और रोग रहित जल मिल पाना कठिन हो रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा 29 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए मूल्यांकन में 445 नदियों में से 275 नदियां प्रदूषित पाई गईं। विश्व भर में स्वच्छ जल की अनुपलब्धता के चलते ही, जल जनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैं। 
आंकड़ों के अनुसार अभी विश्व में प्राय: पौने 2 अरब लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। यह सोचना ही होगा कि केवल पानी को हम किसी कल कारखाने में नहीं बना सकते हैं इसलिए प्रकृति प्रदत्त जल का संरक्षण करना है और एक−एक बूंद जल के महत्व को समझना होना होगा। हमें वर्षा जल के संरक्षण के लिए चेतना ही होगा। अंधाधुंध औद्योगीकरण और तेजी से फैलते कंक्रीट के जंगलों ने धरती की प्यास को बुझने से रोका है। धरती प्यासी है और जल प्रबंधन के लिए कोई ठोस प्रभावी नीति नहीं होने से, स्थिति अनियंत्रित होती जा रही है। कहने को तो धरातल पर तीन चौथाई पानी है किन्तु पीने योग्य कितना यह सर्वविदित है! रेगिस्तानी क्षत्रों का भयावह चित्र चिंतनीय और दुखद है। पानी के लिए आज भी लोगों को मीलों पैदल जाना पड़ता है। आधुनिकता से रंगे इस काल में भी प्यास बुझाने हेतु जल जनित रोग हो जाएं और प्राण संकट पर भी गंदा पानी पीना बाध्यता है। 
प्रधानमंत्री ने जल संकट से उबरने के लिये जन भागीदारी की अपील की है। ये सच है कि बड़े से बड़ी सरकार या व्यवस्था बिना जन भागीदारी के अपने मंतव्यों और उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकती है। जहां देश के अनेक शहरों, कस्बों और गांवों में पानी का भारी संकट है, और स्थानीय नागरिक सरकार और सरकारी तंत्र आश्रित हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं वहीं कुछ ऐसे उदहारण भी हैं जहां स्थानीय लोगों ने अपने बल पर जल संकट से मुक्ति पाई है। बेंगलुरु की सरजापुर रोड पर स्थित आवासीय कॉलोनी 'रेनबो ड्राइव' के 250 घरों में पानी की आपूर्ति तक नहीं थी। आज यह कॉलोनी पानी के मामले में आत्मनिर्भर है और यहां से दूसरी कॉलोनियों में भी पानी आपूर्ति देने लगा है। यह संभव हुआ है पानी बचाने, संग्रह करने और पुनः उपयोगी बनाने से। वर्षा जल संग्रहण के लिए कॉलोनी के हर घर में पुनरुपयोग कुएं बनाए गए हैं। राजस्थान के लोगों ने मरी हुई एक या दो नहीं, बल्कि सात नदियों को फिर से जीवन देकर ये प्रमाणित कर दिया है कि मानव में यदि दृढ़ शक्ति हो तो कुछ भी संभव हो सकता है। जब राजस्थान के लोग, राजस्थान की सात नदियों को पुनर्जीवित कर सकते हैं तो शेष नदियां साफ क्यों नहीं हो सकती हैं? पंजाब के होशियारपुर में बहती काली बीन नदी कभी अति प्रदूषित थी। किन्तु सिख धर्मगुरु बलबीर सिंह सीचेवाल की पहल ने उस नदी को स्वच्छ करवा दिया। 
देश में पानी की समस्या अपने चरम पर है। जल अपव्यय धड़ल्ले से हो रहा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि लोग इसके महत्त्व के बारे में जानते हुए भी निश्चिन्त बने हुए हैं और इसका अपव्यय कर रहे हैं। हमें यह समझना होगा और समझाना होगा कि प्रकृति ने हमें कई अमुल्य उपहार सौंपे है उनमें से पानी भी एक है। इसलिए हमें इसे सहेज कर रखना है। पानी की कमी को वही लोग समझ सकते हैं, जो इसकी कमी से दो चार होते हैं। हम खाने के बिना दो−तीन दिन जीवित रह सकते हैं किन्तु जल बिना जीवन की कल्पना ही असम्भव -सा लगता है। आय के साधन जुटाने में मनुष्य पानी का अंधाधुंध उपयोग कर रहा है। हमें भविष्य की चिंता बिल्कुल नहीं है और न ही हम करना चाहते हैं। यदि विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य इसी प्रकार लगा रहा तो हमारी आने वाली पीढ़ी प्रकृति के अमुल्य उपहार जल से वंचित रह सकती है। 
वर्षा के मौसम में जो पानी बरसता है उसे संरक्षित करने की पूर्ववर्ती सरकार की कोई योजना नहीं रही। ऐसे में समस्या तो होगी ही। वर्षा से पूर्व गांवों में छोटे−छोटे लघु बांध बनाकर वर्षा जल को संरक्षित किया जाना चाहिए। शहर में जितने भी तालाब और बांध हैं। उन्हें गहरा किया जाना चाहिए जिससे उनकी जल संग्रह की क्षमता बढ़े। सभी घरों और अपार्टमेंट में जल संचयन को अनिवार्य किया जाना चाहिए तभी जलसंकट का सामना किया जा सकेगा। गांव और टोले में कुआं रहेगा, तो उसमें वर्षा का पानी जायेगा। तब भूजल और वर्षा का पानी मेल खाएगा। आवश्यक नहीं है कि आप भगीरथ बन जाएं, किन्तु दैनिक जीवन में एक−एक बूंद बचाने का प्रयास तो कर ही सकते हैं। खुला हुआ नल बंद करें, अनावश्यक पानी बहाया न करें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें। इसे अपना अभ्यास बनायें। हमारा छोटा सा अभ्यास आने वाली पीढ़ियों को जल के रूप में जीवन दे सकता है। एक रपट के अनुसार, भारत 2025 तक भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा। हमारे पास मात्र आठ वर्षों का समय है, जब हम अपने प्रयासों से धरती की बंजर होती कोख को पुन: सींच सकते हैं। यदि हम जीना चाहते हैं, तो हमें ये करना ही होगा। 
मई में हमारे प्र मं ने विभिन्न राज्यों के मु मं से बैठकों द्वारा इस समस्या के समाधान के जो अपूर्व प्रभावी उपाय किये हैं, उसे जनसहभागिता का हमारा योगदान, भारत में 2025 तक भीषण जल संकट की उस सम्भावना का यह प्रबल प्रत्युत्तर होगा। हम बदलें, देश बनेगा; भविष्य बनेगा -वन्देमातरम। 
हम जो भी कार्य करते हैं, परिवार/काम धंधे के लिए करते हैं |
देश की बिगड चुकी दशा व दिशा की ओर कोई नहीं देखता |
आओ मिलकर कार्य संस्कृति की दिशा व दशा श्रेष्ठ बनायें-तिलक
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है |
उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर
हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं |
आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक
http://raashtradarpan.blogspot.in/2016/06/blog-post.html
http://samaajdarpan.blogspot.in/2016/06/blog-post.html
http://kaaryakshetradarpan.blogspot.in/2016/06/blog-post.html

Tuesday, April 26, 2016

अलौकिक जीवन

अलौकिक जीवन 

श्री गणेशाय नम: आत्मा, मन और कर्म पवित्र बनायें , जीवन अलौकिक बन जायेगा।
पश्चिम की भौतिकवादी जीवन शैली में चेहरा फैशन हाव भाव धन का प्रदर्शन ही सब कुछ है। उसका अनुसरण कर हम भी फेस बुक में अपने पार्श्व चित्र लगा कर चाहते हैं, सभी मित्र प्रशंसा करे। किन्तु प्रशंसा योग्य हमारे कर्म या आत्मा को बनने का प्रयास कभी नहीं करते। भौतिक जीवन से उठ इसे अलौकिक बनायें।
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है | उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Monday, March 28, 2016

विक्षिप्त क्यों? भारत, मोदी तथा हिंदुत्व के विरोधी

विक्षिप्त क्यों? भारत, मोदी तथा हिंदुत्व के विरोधी 
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका; विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये।
अपनी धर्म संस्कृति को जीवन शैली का आधार बनायें, भारत को एक बार पुनः विश्व गुरु बनायें। - तिलक
शिवलिंग, वर्षप्रतिपदा तथा अन्य सभी भारतीय मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार जानिए। रेडियोधर्मिता का किसी शिवलिंग, ज्योतिर्लिंग से सम्बन्ध जानिए। नालंदा तक्षशिला की शिक्षा जानिए। तब समझमें आएगा, भारत वास्तव में विश्व गुरु था, हिंदू व उसमे विश्व गुरु के, वे तत्व विध्यमान होने से, क्यों बौखलाते हैं भारत के शत्रु ? तथा भारत में नई सत्ता से भारत के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया, क्यों उन्हें विक्षिप्त बना रही है।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा तो कि शिवलिंग ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधी, रेडियोधर्मिता का प्राकृतिक केंद्र व प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं, सक्रिय रेडियोधर्मिता सभी ज्योतिर्लिंग की विशेषता है। अर्थात सम्पूर्ण वैज्ञानिक शक्तिपुंज की आराधना। यह प्रमाण है, युगों पूर्व भारत के वैज्ञानिक चरम का।
किन्तु शर्मनिरपेक्ष दलों व उनके दल्लों, शर्मनिरपेक्ष भांड मीडिया ने उसके प्रति नकारात्मक भाव भरना ही है।
उसी नकारात्मक शर्मनिरपेक्ष भांड मीडिया का सकारात्मक विकल्प, विविध विषयों के 30 ब्लॉग YDMS
www.yugdarpan.simplesite.com
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है | उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर
हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Monday, February 29, 2016

छोटे करदाताओं को राहत, कारों पर उपकर, सेवा कर वृद्धि

छोटे करदाताओं को राहत, कारों पर उपकर, सेवा कर वृद्धि 

वित्त मंत्री अरुण जेटली के 2016-17 के बजट में जहां एक ओर छोटे आयकर दाताओं को राहत दी गयी, वहीं एक करोड़ रुपये से अधिक की आय वालों पर अधिभार तीन प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही यात्री कारों पर भिन्न -2 दर से प्रदूषण उपकर तथा देश में कालाधन रखने वालों के लिये 45 % कर एवं अर्थदंड के साथ एक बारगी अनुपालन खिड़की का प्रस्ताव किया गया है। 
अपना तीसरा बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि क्षेत्र में सुधार हेतु सभी कर योग्य सेवाओं पर 0.5 % ‘कृषि कल्याण’ उपकर लगाने का भी प्रस्ताव किया। साथ ही शीत गृह, शीतल पात्र तथा अन्य वस्तुओं पर परियोजना आयात पर शुल्क में छूट की घोषणा की। सिगरेट और तंबाकू उत्पाद अब और भी महंगे होंगे। इस पर उत्पाद शुल्क 10 से 15 % बढ़ाया गया है। वित्त मंत्री के कर प्रस्तावों से जहां प्रत्यक्ष कर मद में 1,060 करोड़ रुपये का राजस्व क्षय होगा, वहीं अप्रत्यक्ष कर प्रस्ताव से 20,670 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। कुल मिलाकर कर प्रस्तावों से 19,610 करोड़ रुपये की शुद्ध राजस्व प्राप्ति होगी। 
वैश्विक नरमी से अर्थव्यवस्था को उबारने के प्रयास के तहत, बजट में 2016-17 में 19.78 लाख करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव किया गया है, जो चालू वित्त वर्ष से 15.3 % अधिक है। इसमें 5.50 लाख करोड़ रुपये योजना व्यय तथा 14.28 लाख करोड़ रुपये गैर-योजना व्यय है। बजट में 2016-17 में रक्षा क्षेत्र के लिये 162,759 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो चालू वर्ष के संशोधित अनुमान 143,236 करोड़ रुपये से 13 % अधिक है। रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय मद में 86,340 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है, जो चालू वर्ष में संशोधित अनुमान के अनुसार 81,400 करोड़ रुपये था। ब्याज भुगतान के लिये 492,670 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो चालू वर्ष में 442,620 करोड़ रुपये था। छूट 2016-17 थोड़ा कम रहेगी। इसके 250,433 करोड़ रुपये रहने का प्रस्ताव किया गया ,है जो चालू वर्ष में संशोधित अनुमान 257,801 करोड़ रुपये से मामूली कम है। 
छोटे करदाताओं को राहत देते हुए बजट में 5,00,000 रुपये तक वार्षिक आय वालों के लिये धारा 87 (ए) के तहत कर छूट सीमा 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। इस श्रेणी में दो करोड़ करदाता हैं, जिन्हें कर देनदारी में 3,000 रुपये की राहत मिलेगी। जिनके पास अपना मकान नहीं है और नियोक्ताओं से आवास भत्ता नहीं लेता है, उन्हें 60,000 रुपये का छूट मिलेगा, जोवर्तमान 24,000 रुपये है। पहली बार मकान क्रय वालों को 35 लाख रुपये तक के ऋण पर 50,000 रुपये वार्षिक अतिरिक्त ब्याज छूट प्राप्त होगी। किन्तु इसके लिये शर्त है, कि मकान का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक नहीं हो। 
जिनकी व्यावसायिक सकल प्राप्ति 50 लाख रुपये तक है, उन्हें यह मानते हुए कि उनका लाभ 50 % रहता है, अनुमान के आधार पर कराधान की योजना की सीमा में लाने का प्रस्ताव किया गया है। जेटली ने देश में कालाधन और अज्ञात संपत्ति रखने वालों के लिये सीमित अवधि में कर अनुपालन का अवसर देने का भी प्रस्ताव है, ताकि वे अपनी अघोषित आय एवं संपत्ति का विवरण प्रस्तुत कर सकें। ऐसे लोग पर आय के 30 % के तुल्य कर के साथ 7.5 % दण्ड  तथा 7.5 % ब्याज अर्थात कुल 45 % का भुगतान कर नियमों के उल्लंघन की सीमा से बाहर निकल आयें। 
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि इस आवधि में अपने धन सम्पत्ति का विवरण प्रस्तुत करने वालों के विरुद्ध उस धन सम्पत्ति को लेकर आयकर तथा संपत्ति कर कानून के तहत कोई जांच नहीं होगी और अभियोजन से छूट प्राप्त होगी। ध्यान योग्य है कि विदेशों में कालाधन रखने वालों के लिये कुल कर एवं जुर्माना 60 % तक है। बजट में 1998 के अनाम सौदा अधिनियम से भी कुछ शर्तों के साथ छूट का भी प्रस्ताव किया गया है। घरेलू कालेधन की घोषणा के लिए इस सीमित अवधि की नयी योजना के अन्तरगत 7.5 % अधिभार को कृषि कल्याण अधिभार कहा जाएगा और उसका उपयोग कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिये किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी आय घोषणा योजना के तहत धन सम्पत्ति घोषणा की अवधि एक जून से 30 सितंबर 2016 तक देने की योजना है। इसमें घोषणा के दो माह के भीतर उस पर निर्धारित देय राशि का भुगतान करना होगा।’’ प्रस्तावित 0.5 % कृषि कल्याण उपकर सभी सेवाओं पर लागू होगा। इससे प्राप्त राशि का उपयोग कृषि में सुधार एवं किसानों के कल्याण के लिये किया जाएगा। उपकर एक जून से प्रभाव में आएगा। 
शहरों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात की स्थिति पर चिंता जताते हुए जेटली ने कहा कि वह पेट्रोल, रसोई गैस, सीएनजी से चलने वाली छोटी कारों पर एक %, निश्चित क्षमता वाली डीजल कारों पर 2.5 % तथा उच्च इंजन क्षमता वाले वाहनों पर एसयूवी पर 4.0 % की दर से मूलभूत ढांचा उपकर लगाने का प्रस्ताव करते हैं। अपने गत वर्ष के बजट में कंपनी कर को निश्चित समयावधि में 30 % से घटाकर 25 % करने के साथ छूट एवं प्रोत्साहनों को युक्तिसंगत एवं उसे समाप्त करने के वचन को स्मरण करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आयकर कानून के तहत उपलब्ध कराये जा रहे त्वरित मूल्य ह्रास को एक अप्रैल 2017 से अधिकतम 40 % पर सीमित करने का प्रस्ताव किया गया है। अनुसंधान के लिये कटौती का लाभ एक अप्रैल 2017 से 150 % तथा अप्रैल 2020 से 100 % पर सीमित होगा। घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को गति देने के लिये उन्होंने एक मार्च 2016 या उसके बाद गठित नई इकाइयों को 25 % की दर से कर जमा अधिभार तथा उपकर देने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया। किन्तु यह इस शर्त पर है कि वे लाभ या निवेश से जुड़े छूट को लेकर दावा नहीं करेंगे। वित्त मंत्री ने 5.0 करोड़ रुपये तक के व्यवसाय वाले छोटे उद्यमों के लिये कंपनी कर की दर वित्त वर्ष 2016-17 से कम कर 29 % करने का भी प्रस्ताव किया। इसके अतिरिक्त अधिभार और उपकर लगेगा। अभी वे 30 % कंपनी कर तथा अधिभार एवं उपकर देते हैं। 
‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत स्टार्ट-अप के माध्यम रोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत बजट में उनके विस्तार को प्रोत्साहन हेतु अप्रैल 2016 से मार्च 2019 के बीच गठित कंपनियों को उनके लाभ पर पांच वर्ष में से तीन वर्ष के लिये आय में 100 % कटौती की छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। 
नकारात्मक भांड मीडिया जो असामाजिक तत्वों का महिमामंडन करे, उसका सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प, प्रेरक राष्ट्र नायको का यशगान -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS - तिलक संपादक
http://sarvasamaachaardarpan.blogspot.in/2016/02/blog-post.html
http://kaaryakshetradarpan.blogspot.in/2016/02/36000.html
हम जो भी कार्य करते हैं, परिवार/काम धंधे के लिए करते हैं |
देश की बिगड चुकी दशा व दिशा की ओर कोई नहीं देखता |
आओ मिलकर कार्य संस्कृति की दिशा व दशा श्रेष्ठ बनायें-तिलक
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है |  उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर
हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

बजट में कृषि क्षेत्र को प्रस्तावित 36,000 करोड़ रुपए

बजट में कृषि क्षेत्र को प्रस्तावित 36,000 करोड़ रुपए 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के दीर्घ कालिक लक्ष्य के साथ आज इस कृषि क्षेत्र के लिए प्राय: 36,000 करोड़ रुपए के आवंटन की घोषणा की। साथ ही उन्होंने आगामी वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाकर नौ लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कृषि ऋण पर ब्याज छूट के लिए 15,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया जबकि नयी फसल बीमा योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपए और दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया। 
जेटली ने यह भी कहा कि एकीकृत कृषि बाजार 14 अप्रैल को प्रस्तुत किया जाएगा और मार्च 2017 तक सभी 14 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जाएगा। जेटली ने आज लोकसभा में 2016-17 का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा, ‘‘हमें अपने किसानों का आभारी होना चाहिए, जो देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। हमें खाद्य सुरक्षा से परे सोचने और किसानों को आय सुरक्षा की दृष्टी से वापस करने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार द्वारा कृषि और गैर कृषि क्षेत्र में अपने हस्तक्षेप पर, नए सिरे से ध्यान दिया जाएगा जिससे 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो सके।’’ 
जेटली ने कहा, ‘‘कृषि और किसानों के कल्याण के लिए हमारा कुल आवंटन 35,984 करोड़ रुपए है।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करने पर बल या गया है कि किसानों को पर्याप्त और समय पर ऋण मिले। उन्होंने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2015-16 में 8.5 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य के समक्ष 2016-17 में कृषि ऋण का लक्ष्य नौ लाख करोड़ रुपए होगा, जो आज तक का उच्चतम स्तर है।’’ किसानों के ऋण भुगतान का बोझ कम करने के लिए उन्होंने कहा कि ब्याज छूट के लिए 2016-17 बजट में 15,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जेटली ने कहा कि सरकार ने एक उल्लेखनीय फसल बीमा योजना, ‘‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’’ प्रस्तुत की है जिसके लिए 5,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जिससे 2016-17 में प्रभावी कार्यान्वयन हो सके।
उन्होंने कहा कि सिंचाई कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। 
जेटली ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को अभियान के रूप में कार्यान्वित और सुदृढ़ किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि 28.5 लाख हेक्टेयर भूमि को इस योजना के तहत सिंचाई की सीमा में लाया जाएगा। जेटली ने कहा कि नाबार्ड में 20,000 करोड़ रुपए के आरंभिक कोष के साथ एक प्रतिबद्ध दीर्घकालिक सिंचाई कोष बनाया जाएगा जिससे सिंचाई सुविधा तैयार हो। उन्होंने कहा, ‘‘त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) के तहत 89 सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में गति लाई जाएगी जो लम्बे समय से लंबित है।’’ इससे 80.6 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष 89 परियोजनाओं के लिए 17,000 करोड़ रुपए और आगामी पांच वर्ष में 86,500 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। सरकार 31 मार्च 2017 से पूर्व इनमें से कम से कम 23 परियोजनाएं पूरी करेगी।
नकारात्मक भांड मीडिया जो असामाजिक तत्वों का महिमामंडन करे, उसका सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प, प्रेरक राष्ट्र नायको का यशगान -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS - तिलक संपादक 
http://sarvasamaachaardarpan.blogspot.in/2016/02/blog-post.html 
http://kaaryakshetradarpan.blogspot.in/2016/02/36000.html 
हम जो भी कार्य करते हैं, परिवार/काम धंधे के लिए करते हैं |
देश की बिगड चुकी दशा व दिशा की ओर कोई नहीं देखता |
आओ मिलकर कार्य संस्कृति की दिशा व दशा श्रेष्ठ बनायें-तिलक
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है | उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर
हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

विलास पर कर, विकास पर बल

विलास पर कर, विकास पर बल 
तिलक 
29 फर 16 न दि 

बजट 2016-17 में कर ढांचे में कई प्रकार के परिवर्तनों से कारें, सिगरेट, ब्रांडके परिधान और विमान यात्रा महंगी हो जाएगी। वहीं पादत्राण, सौर दीप और राउटर सस्ते होंगे। कृषि कल्याण के लिए अतिरिक्त शुल्क तथा सभी प्रकार की सेवाओं पर मौलिक ढांचा उपकर से होटल आदि में खाना तथा बिलों का भुगतान महंगा हो जाएगा। साथ ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क की दर को बढ़ाकर 15 % कर दिया है। 
बजट से महंगे होने वाले उत्पाद हैं: कारें, सिगरेट, सिगार, तंबाकू, कागज में लिपटी बीड़ी तथा गुटखा, सभी प्रकार की सेवाएं अर्थात बिलों का भुगतान, होटल में खाना और हवाई यात्रा। निर्मित वस्त्र एवं 1,000 रुपये से अधिक के ब्रांडयुक्त परिधान।
सोना और चांदी (चांदी के जड़ाऊ गहनों को छोड़कर) के आभूषण, शुद्ध पेयजल सहित चीनी या मीठी सामग्री से युक्त जल, दो लाख रुपये से अधिक की नकद वस्तुएं और सेवाएं, एल्युमीनियम पन्नी।
––विमान यात्रा
––प्लास्टिक थैला और सनैक्स
––रोपवे, केबलकार की सवारी
––आयातित नकली (इमिटेशन) आभूषण, औद्योगिक सौर जल तापन, कानूनी सेवाएं।
––लॉटरी टिकट
––बसों आदि को किराये पर लेना, 'पैकर्स और मूवर्स' की सेवाएं
––'ई रीडिंग' उपकरण
––अंतरजाल पर मूललिपि बोल के उपकरण, आयातित गोल्फ कार
–सोने की छड़

बजट से ये उत्पाद सस्ते होंगे-
–पादत्राण (फुटवियर)
–सौर दीप
–राउटर, ब्रॉडबैंड मॉडम और सेटटॉप बाक्स, डिजिटल वीडियो अभिलेखन और सीसीटीवी कैमरा।
––हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन,
––स्टरलाइज्ड डायलाइजर
––60 वर्ग मीटर से कारपेट क्षेत्र के कम मूल्य के मकान,
प्रदर्शन के लिए लोक कलाकारों की सेवाएं,
-प्रशीतित पात्र (रेफ्रिजरेटेड कंटेनर)
––पेंशन योजनाएं
––सूक्षम तरंगित तापन (माइक्रोवेव ऑवन)
––आरोग्यकर अस्तर
––चक्षुहीन पठन हेतु उभरे पाठ्य 

नकारात्मक भांड मीडिया जो असामाजिक तत्वों का महिमामंडन करे, उसका सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प, प्रेरक राष्ट्र नायको का यशगान -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS - तिलक संपादक
हम जो भी कार्य करते हैं, परिवार/काम धंधे के लिए करते हैं |
http://sarvasamaachaardarpan.blogspot.in/2016/02/blog-post.html
http://kaaryakshetradarpan.blogspot.in/2016/02/36000.html
 देश की बिगड चुकी दशा व दिशा की ओर कोई नहीं देखता |
 आओ मिलकर कार्य संस्कृति की दिशा व दशा श्रेष्ठ बनायें-तिलक
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है | उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर
हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Wednesday, February 3, 2016

जनसभा में तमिलनाडु राजनीति पर नहीं बोले मोदी

जनसभा में तमिलनाडु राजनीति पर नहीं बोले मोदी 
03 फर 16 कोयंबटूर 

आशा के विपरीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां आयोजित जनसभा में तमिलनाडु की राजनीति पर उलझने से बचे, जबकि इस जनसभा को राज्य में तीन माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के प्रचार अभियान का आधार मान प्रचारित किया गया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रथम बार इस शहर में आए मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से बात की और कई मुद्दों पर विपक्षी कांग्रेस को घेरा, किन्तु कहीं भी राज्य की राजनीति का उल्लेख तक नहीं किया।
यह आश्चर्य की बात है, क्योंकि राज्य के भाजपा नेताओं, जिनमें केंद्रीय मंत्री पोन राधाकृष्णन शामिल हैं, ने गत सप्ताह कहा था कि मोदी जनसभा में भाजपा का चुनावी शंखनाद करने वाले हैं। जबकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तमिझिसाई सुंदरराजन सहित पार्टी नेताओं ने पूर्ण मद्यनिषेध और रोजगार सृजन जैसे मुद्दे उठाए। राधाकृष्णन ने जहां मछुआरों का कठिन मामला उठाया, वहीं श्रीलंका में मृत्यु दंड पाए पांच भारतीय मछुआरों को सकुशल वापस लाने में मोदी सरकार की भूमिका का उल्लेख करना भी नहीं भूले।
वरिष्ठ नेताओं एच राजा और एल गणेशन ने द्रविण राजनीति की आलोचना की और कई मुद्दों पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक को कोसा। राज्य भाजपा नेताओं ने गठबंधन के मुद्दों पर भी बात की और कहा कि पार्टी 234 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में मोर्चे का नेतृत्व करने अथवा अपने बल पर मैदान में उतरने के लिए तैयार है। इससे पूर्व सभास्थल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया। मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के समय इसी मैदान पर जनसभा को संबोधित किया था। मोदी के सभास्थल में प्रवेश करते ही उनके ढेरों प्रशंसकों ने ‘मोदी मोदी’ के नारों से अभिनन्दन किया।
पूरा परिवेश पश्चिम की भेंट चढ़ गया है | उसे संस्कारित, योग, आयुर्वेद का अनुसरण कर हम अपने जीवन को उचित शैली में ढाल सकते हैं | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक